After 3000 long years, Tasmanian Devils Born on Australian Mainland

ऑस्ट्रेलिया के मेनलैंड पर ३००० से भी ज्यादा सालों बाद तस्मानियन डेविल का जन्म हुआ है. 7 शावको ने जन्म लिया है, जो की अब 1 महीने के होने वाले है.  

ऑस्सी आर्क नाम के एक ऑस्ट्रलियन एनिमल प्रिजर्वेशन  प्रोजेक्ट ने वाइल्ड आर्क एंड ग्लोबल वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन के साथ मिलकर, तस्मानियन डेविल्स को ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में मौजूद १००० एकड़ तक फैली, Barrington वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में छोड़ , इन्हें ब्रीड करवाने की कोशिश की. २०२० के अंत में इस समूह ने २६ एडल्ट तस्मानियन डेविल्स को वाइल्ड में छोड़ा. ताकि इन्हें एक नेचुरल हैबिटैट मिल सके और ये ऑस्ट्रेलिया के मेनलैंड पर वापसी कर सके.

उनके इस एफर्ट की वजह से ही, इस जंगल में एक पेयर ने कम से कम 7 जोएय्स को जन्म दिया है. ये बेहद तंदुरुस्त पैदा हुए है , और बड़े होने तक अपनी माँ के पाउच में ही खाना ग्रहण करेंगे. कुछ ही हफ़्तों में ये और बड़े हो जाएँगे , तो इनकी अच्छी सेहत के लिए इन्हें कन्टीन्यूअस्ली मॉनिटर किया जाएगा.

आर्कियोलॉजिकल एविडेन्सेस के हिसाब से, हज़ारो साल पहले ये गोंडवाना लैंड से ऑस्ट्रेलिया की तरफ आए थे. ३००० साल पहले तक, ये अच्छी संख्या में ऑस्ट्रेलिया मेनलैंड पर रहते थे , लेकिन इंसानों या डीन्गोस की एक्ससेसीव हंटिंग का शिकार होने के कारण ये, आखिरकार, वहाँ से विलुप्त हो गए.

हंटिंग डीन्गोस, ऑस्ट्रेलिया के ही कुत्तो की एक प्रजाति है. ये डीन्गोस ऊपर आइलैंड पर नहीं पहुच पाए, इसलिए इनमे से कुछ की जान बच गयी. तब से ये सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के एक आइलैंड राज्य तस्मानिया में ही पाए जाते रहे है. ये तस्मानियन डेविल, फेशिअल ट्यूमर डिजीज यानि मुह पर होने वाले कैंसर की वजह से 1990  के दशक में और भी कम होने लगे. 1996  में फेशिअल ट्यूमर डिजीज ने इन पर कहर बरसाना शुरू किया, ओर इनकी संख्या करीब 9० % तक घटकर सिर्फ 25,००० ही रह गई . यह कैंसर पेरिफेरल नर्वस सिस्टम की प्रमुख , श्वान सेल्स को अटैक करती है. ये इकलोता कम्युनिकेबल कैंसर है.

२००8 में IUCN ने इन्हें एक एन्डेन्जर्ड स्पीशीज के तौर पर लिस्ट किया था. और तब तक माना जा रहा था की २०११ तक ये एक्सटीन्क्ट हो जाएँगे. इन्हें बचाने के लिए स्पीशीज रिकवरी एफर्ट्स की ख़ासा ज़रुरत थी.

ये रात भर घूम कर , भोंकते हुए, कानफोडू आवाज़ निकालते हुए शिकार ढूंढते है. और शिकार मिलने पर उसके मांस और हड्डियों को चीरकर अलग कर देते है. इनका नाम डेविल पड़ने का कारण इनकी डरावनी आवाज़ ही है, जब यूरोपीयन्स पहली बार ऑस्ट्रेलिया में आए , तो रात  में इनकी डरावनी आवाज़ सुन कर इनका नाम शैतान रख दिया . एक भालू को पिल्लै के आकार का बना दीजिये, बस ये कुछ एसे ही दीखते है. छोटे भालू जेसे दिखने की वजह से, उन्नीस्वी सदी के साइंटिस्ट्स इन्हें बियर डेविल भी कहते थे. इनके फोर्लिम्ब्स, यानि आगे वाले पैर इनके हाइंड लिम्स से लम्बे होते है. है ना मज़े की बात, तभी तो ये इतने क्यूट दीखते है, और आसानी से पेड़ों पर चढ़ जाते है. ये क्लाइम्बर्स होने के साथ साथ बेहतरीन स्विम्मर्स भी है. ये बिना रुके, डेढ़ किलोमीटर तक, पच्चीस किलोमीटर पर आर की स्पीड से दौड़ सकते है.

काले से भूरे रंग के फर वाले ये जीव, इनकी गर्दन के निचे पाई जाने वाली, स्कार्फ जेसी सफ़ेद पट्टी के लिए भी मशहूर है.

इनका एक और अट्रेकटिव फीचर है, इनके गुलाबी कान. जब इन्हें ज़्यादा गर्मी लगती है तो इन्ही कानो से ये थोडा खून निकालते है . जिससे इनके कान ब्राइट पिंक कलर के दिखाई देते है. ये थर्मोरेगुलेटर कान इनका तापमान सामान्य रखने में मदद करते है. शरीर से हीट बाहर निकालने के लिए, कुत्तों की तरह इनमें भी ज़्यादा स्वेट ग्लेंड्स नहीं होते. इनका फैट मुख्य तौर पर इनकी टेढ़ी पूँछ में जमा रहता है.

ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि पर छोड़ने से पहले तक ,ये सिर्फ़ एक ही जगह पाए जाते थे, ऑस्ट्रेलिया के घने, जंगली आइलैंड, तस्मानिया में. इन घने जंगल में ये दिन में छिप कर रहते है, लेकिन रात होते ही खाना ढूंढने निकल पड़ते है. भले ही इन्हें अकेले रहना पसंद हो, लेकिन खाने के वक़्त, आस पास मौजूद पाँच से छह डेविल्स साथ होते है. एक टेरिटरी में सामान्यतः १२ तस्मानियन डेविल्स होने की संभावना रहती है. ये नन्हे मार्सूपियल्स, पाउच वाले कंगारू की तरह, अपनी माँ के पाउच में से निकलते है. लेकिन बड़े होने पर ये एक छोटे पिल्लै की साइज़ तक ही पहुच पाते है.  ये महज़ दो फीट लम्बे और 6 किलोग्राम्स से भी कम वज़नी होते है. ये दुनिया में सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले मांसाहारी मार्सुपिअल्स है.

मगर जनाब, इनके नन्हे शरीर पर ना जाइए, क्यूंकि इनकी काटने की क्षमता इनकी हर कमी की भरपाई कर देती है.

इनके वाइड, मस्कुलर, मज़बूत जबड़े अपने शिकार को क्रश करने में ऑर इनके दांत काटने में बेहतरीन है. इनके ये दांत और जबड़े ही , इनकी स्ट्रोंग बाइट फ़ोर्स के कारण है. ये एक बाइट के वक़्त 550 न्यूटन से ज़्यादा का फ़ोर्स एक्ज़र्ट करते  है. इनका ये बड़ा मूह 80 डिग्रीज तक खुल सकता है.

 ये  scavangers  होते है , यानि मरे हुए जानवर पर फीड करते है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर छोटे मोटा शिकार करने की भी क्षमता रखते है.  पर ये अपने से छोटे किसी जीव जेसे चूहे, खरगोश, मेंढक, छिपकली आदि का ही शिकार करते है. और जब ये अपने खाने पर टूट पड़ते है, तो उसे पूरा खाकर ही दम लेते है. मांस, हड्डियाँ, इन्टेसटाइन, खाल , ये कुछ भी बाकी नहीं रखते.

बॉडी साइज़ के रिलेशन में इनकी बाइट, मैमल्स में सबसे ताकतवर होती है.

इनकी अप्पर बॉडी बहुत ही पावरफुली डीज़ाइंड होती है. ताज्मनियन डेविल का सिर इनके धड से अपेक्षाकृत ज़्यादा बड़ा होता है.

लेकिन इतनी क्षमता के बाद भी ये महज़ पाँच साल ही जी पाते है.

२१ दिनों की प्रेगनेंसी के बाद फीमेल तज्मानियन डेविल 18 से ३० बच्चों को जन्म दे सकती है. लेकिन आखिर में दूध की कमी के कारण महज़ 4 बच्चे ही बच पाते है. पाउच से निकलने के तीन महीनो तक ये बच्चे अपनी माँ के पास ही रहते है. और 2 साल के होते ही सेक्सुअली मच्योर हो जाते है.

इनकी संख्या कम होने का एक और कारण भी है, इनका जटिल मेटिंग प्रोसेस. जिसके कारण फीमेल को काफी वज़न बढ़ाना पड़ता है, ताकि ब्रीडिंग के अंत तक वो ज़िंदा बच सके. फीमेल एक साल में सिर्फ एक बार ही मेट करती है. तो साथ रहने और मैटिंग के लिए इनकी टेरिटरी के मेल्स आपस में लड़ते रहते है.

एक मादा अपने जीवन में चार बार प्रेग्नेन्ट हो सकती है. और ये एक मेल के साथ सिर्फ एक ही बार मेट करती है.

आने वाले 2 सालों में ऑस्सी आर्क, 40 और टेज़ी डेविल्स को जंगल में छोड़ने का लक्ष्य रखता है.

इनके यहाँ वापस लोटने , ये ऑस्ट्रेलिया में फेरल कैट्स और फोक्सेस की पोपुलेशन को भी, कंट्रोल करने में, मदद करेंगे, जोकी कई endangered स्पीशीज के लिए खतरा है.

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