Mice Plague 2021 in Autralia

फ़र्ज़ कीजिये कि आप बारिश की आवाज़ से जाग उठते है , तो देखते है अरे ये क्या, चूहे बरस रहे है,  बेड से उतरते है तो सैकड़ो चूहे निकल कर आते है. फिर आपको अलमारी से भी कुछ आवाज़ आती है , आप डरते हुए अल्मारी खोलते है, ऑर दर्ज़नों चूहे निकल कर आप पर गिर जाते है , और आपको काटने लगते है.

जिंदा और मरे हुए चूहे , इतना ही काफी नहीं, सबसे बुरी है इनसे और इनके मल से आने वाली बदबू.  आप खेत में पड़ी अपनी फसल का एक हिस्सा उठाते है , और जब आप निचे देखते है, तो ज़मीन चलती हुई नज़र आती है, क्यूंकि वहाँ सैकड़ो की तादात में चूहे चल रहे है.

एक और द्रश्य बताते है, ये हॉस्पिटल्स में जा कर पेशेंट्स को भी काट रहे है. होटल्स, सुपरमार्केट्स और रेस्त्रों इनके प्रकोप से बंद पड़े है. चाइल्ड केयर सेन्टर्स और ओल्ड एज होम्स में बच्चे और बूढ़े सहम चुके है.

नहीं, ये किसी मूवी का सीन नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की हकीकत है.  ऑस्ट्रेलिया में मिड – मार्च से यही सब चल रहा है. इतनी संख्या में अचानक से हमला कर इन रोडेन्ट्स ने माउस प्लेग यानि चूहों की महामारी फैला दी है. और ऑस्ट्रेलिया का न्यू साउथ वेल्स, इनका हॉट –स्पॉट बन चुका है. वहाँ के किसानो ने इसे एक इकनोमिक और पब्लिक हेल्थ क्राइसिस बताया है. सिडनी , ब्रिस्बैन, एडलेड, मेलबर्न , ये माइस, सब जगह है.  

ये इतनी ज़्यादा संख्या में है की कोई भी तरीका काफी नहीं हो रहा रहा है इनके अटैक से बचने के लिए. ऑस्ट्रेलिया के नागरिक और खासकर किसानो के लिए ये भारी समस्या बन कर उबरे है. ये इलेक्ट्रिक वायर्स , फसलें, घर और यहाँ तक की रेस्त्रों में संग्रह किये गए खाने ऑर इनकी राह में आने वाली सभी चीजों की बर्बाद कर रहे है. लोकल रेस्त्रों ओनर्स को मील सप्लाई और रेस्त्रों बंद करने पड़े है. लोग इनसे बचने के लिए स्टील वूल के पैबंद लगा रहे है, घरों में सहम कर बेठे है, और अब ऑस्ट्रेलियन गवर्नमेंट ने इन्हें मारने के लिए जिंक फ़ोस्फाइड वाली बैट को भी मान्यता दे दी है. और माउस बैट्स में ज़हर की मात्रा बढाने की भी अनुमति दे दी है.

वहाँ पर ब्रोमेडीओलाइन पोइज़न बेन है, लेकिन इस सिचुएशन में इसे भी मान्यता दे दी गयी है. यह एक एंटी कोग्युलेंट होता है जो २४ घंटो में ही इन्हें मारने की क्षमता रखता है. लेकीन इसके कुछ नुक्सान भी है. जंगली जानवरों और पर्यावरण पर इस ज़हर का  नेगेटिव इम्पैक्ट होता है. इंसानों में भी inhalation,  खाने या छूने से, eye irritation जेसे ज़हरीले प्रभाव देखने को मिलते है.  कुछ पर्यावरण विशेषज्ञ इनके प्रमुख शिकारी यानि उल्लुओं को इस्तेमाल करने की सलाह पर भी ज़ोर दे रहे है , लेकिन लाखों की संख्या में फैले इन चूहों को रोकने में यह कदम नाकाफी है.

इनसे निपटने के लिए ऑस्ट्रलियन गवर्नमेंट ने ५० मिलियन डॉलर्स के पैकेज की घोषणा की है . अनुमान लगाया जा रहा है की यह प्लेग 2 वर्षो तक रहेगा. आइये इस माउस प्लेग २०२१ के कारण जानते है. गुज़ारा हुआ साल २०२० इंसानी आबादी के लिए बहुत अच्छा नहीं था, कोविड 19 ने पुरे विश्व में जान, माल और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुचाया. लेकिन ये ऑस्ट्रेलियाई फार्मर्स के लिए बहुत अच्छा गुज़रा. ऑस्ट्रेलिया में गत साल अच्छी बारिश हुई, इतनी जितनी पिछले तीन सालों के सूखे को मिलाने पर भी नहीं हुई,  जिससे फसलो की पैदावार भी भारी मात्रा में हुई.

लेकिन ये ऑर किसी के लिए भी अनुकूल माहोल था, जिनपर ना तो वहां के किसानों ने, ना ही किसी ऑर ने, ध्यान दिया.

ऑस्ट्रेलिया के चूहों के लिए. चूहे इंसानों के बाद धरती पर दूसरा सबसे ज़्यादा पाया जाने वाले स्तनधारी पशु है. इस बारिश ऑर फसलों की बढ़िया पैदावार ने इनका काम और भी आसान कर दिया. और ये अपनी संख्या में भारी इजाफा करते गए , जब तक इन्होने दल से निकल कर इंसानों पर उनकी गेहू , मक्का, घास की पैदावार ऑर उनके सामान पर हमला नहीं कर दिया , किसी ने इन लाखो की संख्या में पहुच चुके चूहों पर ध्यान नहीं दिया. ऑस्ट्रेलिया में रोडेन्ट्स की 60  नेटिव और तीन introduced पेस्ट स्पीशीज है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में यह पहला मामला नहीं है. 2011 और इससे पहले 1980 और 1990 के दशक में भी माइस ने ऑस्ट्रेलिया में अपना प्रकोप फैलाया था.

1993 में यहाँ क्रॉप्स और animals को 96 million का नुकसान हुआ था. 1978, फर्स्ट फ्लीट में, जब से इंग्लैंड कोलोनिस्ट्स के साथ वाइल्ड हाउस माइस, मस मस्कुलस आए थे, तब से सदर्न और ईस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में, ये हर चार साल में एक प्लेग तो ले ही आते है.  

ये लेप्टोस्पायरोसिस और टाइफस फीवर फैलाते है. और ऐसी ही कई बीमारियों के लिए वेक्टर का काम करते है.

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